
दिवाली पर लौटी मुस्कान बाल कल्याण समितिखंडवा की अद्भुत संवेदनशील पहल।
खंडवा।। दिवाली से पहले खंडवा जिले में मानवता और संवेदनशीलता की ऐसी मिसाल देखने को मिली जिसने हर किसी का दिल छू लिया। बाल कल्याण समिति खंडवा (प्रथम वर्ग श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट समकक्ष खंडपीठ) ने एक नाबालिग बालिका को उसके परिजनों से मिलवाकर अंधेरों में खोए परिवार के जीवन में फिर से उजाला भर दिया।
समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि मान्धाता थाना क्षेत्र की13 वर्षीय नाबालिग बालिका प्रेम प्रसंग के चलते तब घर से निकल गई जब उसके माता-पिता दूसरे शहर में थे। वह अपने पुरुष मित्र के साथ शादी करने की योजना बनाकर घर से निकली, परंतु भाग्य ने कुछ और ही तय किया था। गलती से दोनों गलत ट्रेन में बैठ गए और महाराष्ट्र के चालीसगांव पहुंच गए। जांच में सामने आया कि साथ गया युवक भी सिर्फ 17 वर्ष का नाबालिग था।
जलगांव आरपीएफ ने दोनों को संरक्षण में लेते हुए बाल कल्याण समिति जलगांव के समक्ष प्रस्तुत किया, जहां समिति ने आदेश जारी कर बालिका को बालिका गृह में रखा। लगभग 15 दिनों तक बालिका वहीं रही। सुनील जैन ने बताया कि उधर बाल कल्याण समिति खंडवा ने जैसे ही प्रकरण की जानकारी प्राप्त की, तत्परता और संवेदनशीलता से कार्यवाही आरंभ की। अध्यक्ष प्रवीण शर्मा के नेतृत्व में समिति ने परिजनों से संपर्क साधा और मान्धाता थाना पुलिस की मदद से बालिका को जलगांव से बुलवाया।
रात के 9 बजे जब पुलिस बालिका को लेकर समिति के समक्ष पहुंची, तो समिति की टीम ने देर रात तक बैठकर बाल न्यायालय में विधिक प्रक्रिया पूर्ण की और बालिका को परिजनों के सुपुर्द कर दिया — ताकि वह अपने परिवार के साथ दिवाली की खुशियां मना सके।
अपनी बच्ची को गले लगाते ही परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। भावुक होकर उन्होंने कहा — “समिति ने हमारी बच्ची को वापस दिलाकर हमें जीवन का सबसे बड़ा दीपक दे दिया। अब हम उसे कभी अकेला नहीं छोड़ेंगे।”
अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा — “दिवाली का सच्चा अर्थ केवल दीपक जलाना नहीं, बल्कि किसी के जीवन में उजाला भरना है। यह बालिका का परिवार से मिलन उस सच्चे दीपोत्सव की अनुभूति है।”
बालिका के परिजनों ने अध्यक्ष न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा प्रवीण शर्मा सहित समिति के सदस्यों मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल और स्वप्निल जैन की पूरी टीम को हृदय से धन्यवाद दिया। इस पहल ने न केवल एक परिवार को मिलाया, बल्कि समाज को यह गहरा संदेश दिया कि जब
संवेदनशीलता, सतर्कता और स्नेह मिलकर कार्य करते हैं, तब हर खोया उजाला लौट आता है।”इस दिवाली खंडवा ने देखा करुणा, कर्तव्य और प्रेम से जगमगाती सच्ची दीपावली।












